Unki kitaab me..

फूल पाने की कोशिश में कांटे चुभे देखे
तेरे इश्क में हमने महीनो रतजगे देखे

ये केसा प्यार था तेरा, ये केसी दोस्ती तेरी
हजारो ज़ख़्म मैंने अपने दिल पर लगे देखे

उस दिन से मेरी दुनिया वीरान हो गई
जिस दिन तेरे दस्त हिना से सजे देखे

अँधेरे दूर करने की ये कोशिश नाकाम हो गई
रोशन चिराग करते ही हवाऔ से बुझे देखे

फ़साना दुश्मनों का मेरे केसे मुक़म्मल हो पाता
अपनी आस्तीनों में मैंने अपने सगे देखे

उस दिन से हिरासा हु जिस दिन से ‘सुधीर’
उनकी किताब में ख़त रखे गैर के देखे

सुधीर मौर्या ‘सुधीर’
गंज जलालाबाद, उन्नाव-२४१५०२
०९६९९७८७६३४

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