सजा दो मेरा आँगन सनम..

Sudheer
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'हो न हो' - सुधीर मौर्य का प्रेम काव्य

‘हो न हो’ – सुधीर मौर्य का प्रेम काव्य


आओ आँखों से अपनी दिखा दू तुझे
प्रेम का हर सलीका सिखा दूँ तुझे
मेरे मन में है क्या ये बता दूँ तुझे

तेरी हर एक अदा ने दीवाना किया
पतझड़ों का भी मौसम सुहाना किया
मेरी किस्मत जो दिलमे ठिकाना किया

ये दमकता हुआ तेरा यौवन सनम
ये महकता हुआ तेरा दामन सनम
इस से सजा दो मेरा आँगन सनम

‘हो न हो’ से।।
सुधीर मौर्य ‘सुधीर’

‘हो न हो’ – सुधीर मौर्य का प्रेम काव्य

मेरी ७९ नज़्म का संग्रह…

'हो न हो' - सुधीर मौर्य का प्रेम काव्य

‘हो न हो’ – सुधीर मौर्य का प्रेम काव्य

सुधीर मौर्य ‘सुधीर’
गंज जलालाबाद, उन्नाव
२०९८६९