Tera Aks

तेरा अक्स

तनहइयो ने कब
मेरे हाथ में
जाम दे दिया
कुछ इसका पता नहीं
हर शाम-हर रात
हर सुबह
बस में और
मेरा जाम
मुझे लगा
अब जिन्दगी
चैन से कट जायगी
ग़लतफ़हमी थी मेरी
अब तो हाथ में
जाम लेने से भी
डर लगता हे

न जाने क्यों
तेरा अक्स
मुझे अब
उसमे नज़र आता हे.

‘लम्स’ से
सुधीर मौर्या ‘सुधीर’
गंज जलालाबाद, उन्नाव
२०९८६९
09699787634

Prem ki Naav

प्रेम की नाव

उसकी बातो में
लगने लगा हे
बहुत कुछ
बनाव इन दिनों.

किसी और की
गली से
गुजरने लगे हे
उसके पावं इन दिनों.

मागने लगा हे
कोई और
उसके जुल्फों की
छाव इन दिनों.

हाँ चर्चे हे
उसके एक और
अफएर के
गाँव में
इन दिनों.

हो न हो
वो सवार हे
प्रेम की
दो नाव में इन दिनों.

सुधीर मौर्या ‘सुधीर’
गंज जलालाबाद, उन्नाव
२४१५०२
०९६९९७८७६३४/09619483963

Unki kitaab me..

फूल पाने की कोशिश में कांटे चुभे देखे
तेरे इश्क में हमने महीनो रतजगे देखे

ये केसा प्यार था तेरा, ये केसी दोस्ती तेरी
हजारो ज़ख़्म मैंने अपने दिल पर लगे देखे

उस दिन से मेरी दुनिया वीरान हो गई
जिस दिन तेरे दस्त हिना से सजे देखे

अँधेरे दूर करने की ये कोशिश नाकाम हो गई
रोशन चिराग करते ही हवाऔ से बुझे देखे

फ़साना दुश्मनों का मेरे केसे मुक़म्मल हो पाता
अपनी आस्तीनों में मैंने अपने सगे देखे

उस दिन से हिरासा हु जिस दिन से ‘सुधीर’
उनकी किताब में ख़त रखे गैर के देखे

सुधीर मौर्या ‘सुधीर’
गंज जलालाबाद, उन्नाव-२४१५०२
०९६९९७८७६३४

वो अधरों के स्वर

नीले अम्बर के
मंडप तले
वो नीले नेनो का
जादू मुझे बेकल कर गया

कली गुलाबो के से
वो अधरों के स्वर
मेरे लफ्जों को
देखो ग़ज़ल कर गया

काली घटाओ के से
उन जुल्फों का उड़ना
उनके कदमो का लम्स
मेरी झोपडी को महल कर गया

अपने गमो को
आखिर भुला ही बेठे
मेरी आँखों को हाय
फ़साना दर्द का उनका सजल कर गया

‘लम्स’ से
सुधीर मौर्या ‘सुधीर’
०९६९९७८७६३४

kisan ki dasha

1)  प्रकृति और सर्कार, राखे दोनों भूखा
  कहीं-कहीं पे बाढ़ हे कहीं-कहीं पे सुखा.

२) छीन ज़मीं किसानो की मौज उडावे बिल्डर
  ग्राम देवता के घर का बारिश में टपके छप्पर

३) जो उगाए गन्ना को बिना लिए एक सांस
  एक सेर शक्कर वो पावे देकर रूपए पचास

४) आँख-कान सरकार के बंद कृषक करे फ़रियाद
  गाडी भर गेहूँ के बदले मुट्ठी भर हे खाद

५) आया पूस कटत  हे पाला थर-थर बुध्ह्वा कांपे
   तोड़ की अपने घर का छप्पर बारे आगि तापे

६) खून पसीना बहाए के रहा किसान भिकारी
  मार झपट्टा ले उड़े सब अनाज व्यापारी

सुधीर मौर्या “सुधीर’
ग्राम + पोस्ट – गंज जलालाबाद, जिला- उन्नाव, पिन – २४१५०२
फ़ोन- ०९६९९७८७६३४/०९६१९४८३९६३
जन्म- ०१/११/१९७९, कानपूर
मुंबई की एक अभियांत्रिकी कंपनी में अभियंता
अभियांत्रिकी में डिप्लोमा, प्रबंधन में पोस्ट डिप्लोमा
प्रकाशित पुस्तके- १) आह (ग़ज़ल संग्रह)
                         २) लम्स ( कविता संग्रह)
                         ३) अधूरे पंख ( कहानी संग्रह, प्रेस में)